तीन-तीन दिन चलती हैं 9वीं-10वीं की कक्षाएं
समस्तीपुरजिले में सुशासन  सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार का राग अलाप रही हैवही इसकी सफलता की डफली भी बज रही है। दलसिंहसराय के इकलौते बालिका उच्च विद्यालय का हाल तो देखिए, यहां तीन-तीन दिनों के अंतराल पर क्लास चलती है। यानी तीन दिन 9वीं कक्षा की छात्राएं पढ़ती हैं तो तीन दिन 10वीं की। विद्यालय की यह शैक्षणिक व्यवस्था क्षेत्र में माखौल बनी है। लेकिन इसकी खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है। इस विद्यालय में भवनों का अभाव है। बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यालय प्रधान ने तीन-तीन दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है। वर्ष 2009 में विकास यात्रा के दौरान यहां आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सैकड़ों छात्राओं ने विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया था। उन्होंने तत्काल इसे स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। मगर मुख्यमंत्री की उस घोषणा को आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इस संबंध में एसडीओ नवीन का कहना है कि इसके लिए शिक्षा विभाग को पहल करनी चाहिए। वे तो केवल सहयोग कर सकते हैं।
30-30 हैं सेक्शन
इस विद्यालय में छात्राओं की संख्या करीब 2000 है। इनका वर्ग 30-30 सेक्शन में बंटा है। 9वीं कक्षा में भी 30 सेक्शन हैं और 10वीं कक्षा में भी 30 सेक्शन हैं। वर्ग कक्ष केवल सात हैं और 14 शिक्षक। जगह के अभाव में प्रतिदिन 300 से 400 छात्राएं बिना पढ़े ही लौट जाती हैं। जगह के अभाव की समस्या के मद्देनजर पूर्व सांसद मंजय लाल, आलोक महतो एवं विधान पार्षद वासुदेव सिंह ने अपने फंड से एक-एक कमरा मुहैया कराया था।
कहती हैं छात्राएं
विद्यालय की छात्रा ललिता कुमारी का कहना है कि जगह के अभाव में पठन-पाठन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रीति कुमारी कहती हैं कि वर्ग में जगह लेने के लिए समय से पहले आना पड़ता है। प्रियंका बताती हैं कि गर्मी के दिनों में भेड़-बकरियों की तरह बैठकर पढ़ना नागवार लगता है। ज्योति कुमारी कहती हैं कि उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है।
कहते हैं अभिभावक
शंकर राय बताते हैं कि बच्चियों की पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। मगर इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं है। इसी तरह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अरुण प्रसाद सिंह, भोला राय आदि कहते हैं कि नेता, मंत्री भी इस विद्यालय की ओर कोई ध्यान नहीं देते।
''प्रशासनिक शिथिलता के कारण अब तक विद्यालय को स्थानान्तरित नहीं किया जा सका है। मुख्यमंत्री महोदय और डीइओ को इससे संबंधित पत्र लिखा गया था। बंद पडे़ बाजार समिति परिसर एवं छत्रधारी इंटर विद्यालय के पीछे इसे स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया था, मगर इस पर आम सहमति नहीं बन पाई।''
दुर्गा प्रसाद सिंह, विधायक
''विद्यालय में पठन-पाठन की ऐसी व्यवस्था के पीछे एक मात्र कारण क्लास रूम का अभाव है। इससे काफी परेशानी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ''
उदय प्रकाश सिन्हा
प्रभारी प्रधानाध्यापक

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