गुरु के साथ होने का अर्थ बोधि वृक्ष अंगरेजी शब्द गाइड संस्कृत के गुरु शब्द से आया है. गिटार, संगीत या अन्य किसी भी प्रकार का शिक्षण हो, सभी कायरें के लिए एक गाइड चाहिए. गुरु वह है जो मनुष्य की प्रज्ञा और ज्ञान में मार्गदर्शन करता है और प्राणशक्ति जगाता है. हर व्यक्ति के भीतर यह गुरु तत्व है. जाने-अनजाने तुम किसी न किसी के गुरु हो. जब भी तुमने बिना किसी आशा के किसी के लिए कुछ किया हो, किसी को कोई सलाह दी हो, मार्गदर्शन किया हो, प्रेम दिया हो और देखभाल की हो, तब तुमने गुरु की ही भूमिका निभायी है. गुरु तत्व सम्मान और विश्वास करने की चीज है. तुम्हारे आसपास कितने ही लोग मूड, भावनाओं और दोषारोपण के बीच अटके हैं, लेकिन अगर तुम्हारे पास गुरु हैं तो इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पडे.गा. और अगर पडे.गा भी तो वह कुछ पलों से ज्यादा टिकनेवाला नहीं. यह वैसे ही है जैसे जब तुम्हारे पास रेनकोट होता है, तो तुम अपने को बरसात से बचा पाते हो. जब व्यक्ति गुरु तत्व के इस सिद्धांत के साथ चलता है, तब उसकी सभी सीमाएं मिट जातीं हैं और वह आसपास के सभी व्यक्तियों और ब्रह्मंड के साथ एक होने का अनुभव...
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Showing posts from January, 2013
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अमेरिका के लॉस वेगास में भले ही मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए विश्व की कई सुन्दरियां अपनी सुंदरता की नुमाइश कर रही हों परंतु इसकी धमक बिहार के एक गांव में गूंज रही हैं. प्रतियोगिता में भारत की प्रतिभागी की जीत के लिए बिहार के समस्तीपुर के सिंघियाघट गांव में पूजा का आयोजन तो किया ही गया है लोग सभी अपने भगवान और श्रद्घेय से बिहार की बेटी के लिए ही जीत की दुआ मांग रहे हैं. दरअसल इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही शिल्पा सिंह का जन्म समस्तीपुर जिले के सिंधिया प्रखंड के विष्णपुर डीहा गांव में हुआ था. जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर इस गांव में ना केवल खुशी का माहौल है बल्कि सभी अपने गांव की बेटी को जीताना चाह रहे हैं. गांव के लोग बताते हैं कि गावं के स्वर्गीय परमेश्वरी नारायण सिंह प्रारंभ में तो एक साधारण किसान थे परंतु बाद में उन्हें एक कर्मचारी की नौकरी मिल गई. इनके बड़े पुत्र दिनेश कुमार सिंह जो दिल्ली में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं और छोटे पुत्र सुरेश कुमार सिंह इंडियन ऑयल के मुंबई स्थित प्रधान कार्यालय में वरिष्ठ अभि...
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तीन-तीन दिन चलती हैं 9वीं-10वीं की कक्षाएं समस्तीपुरजिले में सुशासन सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार का राग अलाप रही हैवही इसकी सफलता की डफली भी बज रही है। दलसिंहसराय के इकलौते बालिका उच्च विद्यालय का हाल तो देखिए, यहां तीन-तीन दिनों के अंतराल पर क्लास चलती है। यानी तीन दिन 9वीं कक्षा की छात्राएं पढ़ती हैं तो तीन दिन 10वीं की। विद्यालय की यह शैक्षणिक व्यवस्था क्षेत्र में माखौल बनी है। लेकिन इसकी खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है। इस विद्यालय में भवनों का अभाव है। बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यालय प्रधान ने तीन-तीन दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है। वर्ष 2009 में विकास यात्रा के दौरान यहां आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सैकड़ों छात्राओं ने विद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया था। उन्होंने तत्काल इसे स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। मगर मुख्यमंत्री की उस घोषणा को आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इस संबंध में एसडीओ नवीन का कहना है कि इसके लिए शिक्षा विभाग को पहल करनी चाहिए। वे तो केवल सहयोग कर सकते हैं। 30-30 हैं सेक्शन ...